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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हुस्न के जल्वे नहीं मुहताज-ए-चश्म-ए-आरज़ू
शम्अ जलती है इजाज़त ले के परवाने से क्या

आनंद नारायण मुल्ला




इश्क़ करता है तो फिर इश्क़ की तौहीन न कर
या तो बेहोश न हो हो तो न फिर होश में आ

आनंद नारायण मुल्ला




इश्क़ करता है तो फिर इश्क़ की तौहीन न कर
या तो बेहोश न हो, हो तो न फिर होश में आ

आनंद नारायण मुल्ला




इश्क़ में वो भी एक वक़्त है जब
बे-गुनाही गुनाह है प्यारे

आनंद नारायण मुल्ला




जिस के ख़याल में हूँ गुम उस को भी कुछ ख़याल है
मेरे लिए यही सवाल सब से बड़ा सवाल है

आनंद नारायण मुल्ला




कहने को लफ़्ज़ दो हैं उम्मीद और हसरत
इन में निहाँ मगर इक दुनिया की दास्ताँ है

आनंद नारायण मुल्ला




ख़ुदा जाने दुआ थी या शिकायत लब पे बिस्मिल के
नज़र सू-ए-फ़लक थी हाथ में दामान-ए-क़ातिल था

आनंद नारायण मुल्ला