मिरे घर में तो कोई भी नहीं है
ख़ुदा जाने मैं किस से डर रहा हूँ
अमीर क़ज़लबाश
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मिरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा
इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
अमीर क़ज़लबाश
मिरे पड़ोस में ऐसे भी लोग बसते हैं
जो मुझ में ढूँड रहे हैं बुराइयाँ अपनी
अमीर क़ज़लबाश
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मुझ से बच बच के चली है दुनिया
मेरे नज़दीक ख़ुदा हो जैसे
अमीर क़ज़लबाश
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पूछा है ग़ैर से मिरे हाल-ए-तबाह को
इज़हार-ए-दोस्ती भी किया दुश्मनी के साथ
अमीर क़ज़लबाश
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सुब्ह तक मैं सोचता हूँ शाम से
जी रहा है कौन मेरे नाम से
अमीर क़ज़लबाश
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सुना है अब भी मिरे हाथ की लकीरों में
नजूमियों को मुक़द्दर दिखाई देता है
अमीर क़ज़लबाश
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