आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह
हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह
अमीर क़ज़लबाश
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अब सिपर ढूँड कोई अपने लिए
तीर कम रह गए कमानों में
अमीर क़ज़लबाश
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अपने हमराह ख़ुद चला करना
कौन आएगा मत रुका करना
अमीर क़ज़लबाश
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एक ख़बर है तेरे लिए
दिल पर पत्थर भारी रख
अमीर क़ज़लबाश
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होना पड़ा है ख़ूगर-ए-ग़म भी ख़ुशी की ख़ैर
वो मुझ पे मेहरबाँ हैं मगर बे-रुख़ी के साथ
अमीर क़ज़लबाश
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इक परिंदा अभी उड़ान में है
तीर हर शख़्स की कमान में है
अमीर क़ज़लबाश
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इतना बेदारियों से काम न लो
दोस्तो ख़्वाब भी ज़रूरी है
अमीर क़ज़लबाश
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