इक वही शख़्स मुझ को याद रहा
जिस को समझा था भूल जाऊँगा
सलमान अख़्तर
इक वही शख़्स मुझ को याद रहा
जिस को समझा था भूल जाऊँगा
सलमान अख़्तर
जब ये माना कि दिल में डर है बहुत
तब कहीं जा के दिल से डर निकला
सलमान अख़्तर
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झाँकते रात के गरेबाँ से
हम ने सौ आफ़्ताब देखे हैं
सलमान अख़्तर
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झाँकते रात के गरेबाँ से
हम ने सौ आफ़्ताब देखे हैं
सलमान अख़्तर
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झूटी उम्मीद की उँगली को पकड़ना छोड़ो
दर्द से बात करो दर्द से लड़ना छोड़ो
सलमान अख़्तर
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जिस से सारे चराग़ जलते थे
वो चराग़ आज कुछ बुझा सा था
सलमान अख़्तर
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