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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

इक वही शख़्स मुझ को याद रहा
जिस को समझा था भूल जाऊँगा

सलमान अख़्तर




इक वही शख़्स मुझ को याद रहा
जिस को समझा था भूल जाऊँगा

सलमान अख़्तर




जब ये माना कि दिल में डर है बहुत
तब कहीं जा के दिल से डर निकला

सलमान अख़्तर




झाँकते रात के गरेबाँ से
हम ने सौ आफ़्ताब देखे हैं

सलमान अख़्तर




झाँकते रात के गरेबाँ से
हम ने सौ आफ़्ताब देखे हैं

सलमान अख़्तर




झूटी उम्मीद की उँगली को पकड़ना छोड़ो
दर्द से बात करो दर्द से लड़ना छोड़ो

सलमान अख़्तर




जिस से सारे चराग़ जलते थे
वो चराग़ आज कुछ बुझा सा था

सलमान अख़्तर