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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

चाँद सूरज की तरह तुम भी हो क़ुदरत का खेल
जैसे हो वैसे रहो बनना बिगड़ना छोड़ो

सलमान अख़्तर




चाँद सूरज की तरह तुम भी हो क़ुदरत का खेल
जैसे हो वैसे रहो बनना बिगड़ना छोड़ो

सलमान अख़्तर




देखे जो मेरी नेकी को शक की निगाह से
वो आदमी भी तो मिरे अंदर है क्या करूँ

सलमान अख़्तर




गुफ़्तुगू तीर सी लगी दिल में
अब है शायद इलाज सन्नाटा

सलमान अख़्तर




हम जो पहले कहीं मिले होते
और ही अपने सिलसिले होते

सलमान अख़्तर




हम जो पहले कहीं मिले होते
और ही अपने सिलसिले होते

सलमान अख़्तर




हज़ार चाहें मगर छूट ही नहीं सकती
बड़ी अजीब है ये मय-कशी की आदत भी

सलमान अख़्तर