चाँद सूरज की तरह तुम भी हो क़ुदरत का खेल
जैसे हो वैसे रहो बनना बिगड़ना छोड़ो
सलमान अख़्तर
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चाँद सूरज की तरह तुम भी हो क़ुदरत का खेल
जैसे हो वैसे रहो बनना बिगड़ना छोड़ो
सलमान अख़्तर
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देखे जो मेरी नेकी को शक की निगाह से
वो आदमी भी तो मिरे अंदर है क्या करूँ
सलमान अख़्तर
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गुफ़्तुगू तीर सी लगी दिल में
अब है शायद इलाज सन्नाटा
सलमान अख़्तर
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हम जो पहले कहीं मिले होते
और ही अपने सिलसिले होते
सलमान अख़्तर
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हम जो पहले कहीं मिले होते
और ही अपने सिलसिले होते
सलमान अख़्तर
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हज़ार चाहें मगर छूट ही नहीं सकती
बड़ी अजीब है ये मय-कशी की आदत भी
सलमान अख़्तर
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