कटेगी कैसे गुल-ए-नौ की ज़िंदगी या-रब
कि इस ग़रीब का ख़ानों में घर अभी से है
सलाम संदेलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ख़ुशी के फूल खिले थे तुम्हारे साथ कभी
फिर इस के ब'अद न आया बहार का मौसम
सलाम संदेलवी
टैग:
| बहार |
| 2 लाइन शायरी |
क्या इसी को बहार कहते हैं
लाला-ओ-गुल से ख़ूँ टपकता है
सलाम संदेलवी
क्या इसी को बहार कहते हैं
लाला-ओ-गुल से ख़ूँ टपकता है
सलाम संदेलवी
मता-ए-ग़म मिरे अश्कों ही तक नहीं महदूद
इन्हीं में टूटे सितारों को भी शुमार करो
सलाम संदेलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
मुझ को तो ख़ून-ए-दिल ही पीना है
दस्त-ए-साक़ी में गर है जाम तो क्या
सलाम संदेलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |
मुझ को तो ख़ून-ए-दिल ही पीना है
दस्त-ए-साक़ी में गर है जाम तो क्या
सलाम संदेलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
| 2 लाइन शायरी |

