मैं ने जिस की आँख से देखे अपने ख़्वाब
अब उस का एहसास भी मेरे लिए अज़ाब
सलीम अंसारी
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मैं ने जिस की आँख से देखे अपने ख़्वाब
अब उस का एहसास भी मेरे लिए अज़ाब
सलीम अंसारी
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मंदिर मस्जिद तोड़िए लेकिन रहे ख़याल
शीशे में विश्वास के पड़ जाए न बाल
सलीम अंसारी
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मेरे चारों ओर थे तरह तरह के लोग
फिर भी मुझ को लग गया तंहाई का रोग
सलीम अंसारी
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मेरे चारों ओर थे तरह तरह के लोग
फिर भी मुझ को लग गया तंहाई का रोग
सलीम अंसारी
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रातें जंगल की तरह और दिन रेगिस्तान
मेरी जीवन यात्रा कैसे हो आसान
सलीम अंसारी
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रफ़्ता रफ़्ता घुल गई मेरी सोच की बर्फ़
यानी मैं ख़ुद हो गया अपने हाथों सर्फ़
सलीम अंसारी
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