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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हुई थी ख़्वाब में ख़ुशबू सी महसूस
तुम आए ख़्वाब की ता'बीर देखी

साहिर होशियारपुरी




जब बिगड़ते हैं बात बात पे वो
वस्ल के दिन क़रीब होते हैं

साहिर होशियारपुरी




कौन कहता है मोहब्बत की ज़बाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

साहिर होशियारपुरी




कौन कहता है मोहब्बत की ज़बाँ होती है
ये हक़ीक़त तो निगाहों से बयाँ होती है

साहिर होशियारपुरी




फिर किसी बेवफ़ा की याद आई
फिर किसी ने लिया वफ़ा का नाम

साहिर होशियारपुरी




तुम न तौबा करो जफ़ाओं से
हम वफ़ाओं से तौबा करते हैं

साहिर होशियारपुरी




तुम न तौबा करो जफ़ाओं से
हम वफ़ाओं से तौबा करते हैं

साहिर होशियारपुरी