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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

ख़ुदा आबाद रक्खे मय-कदे को
बहुत सस्ते छुटे दुनिया-ओ-दीं से

रियाज़ ख़ैराबादी




ख़ुदा आबाद रक्खे मय-कदे को
बहुत सस्ते छुटे दुनिया-ओ-दीं से

रियाज़ ख़ैराबादी




ख़ुदा के हाथ है बिकना न बिकना मय का ऐ साक़ी
बराबर मस्जिद-ए-जामे के हम ने अब दुकाँ रख दी

रियाज़ ख़ैराबादी




किस किस तरह बुलाए गए मय-कदे में आज
पहुँचे बना के शक्ल जो हम रोज़ा-दार की

रियाज़ ख़ैराबादी




किस किस तरह बुलाए गए मय-कदे में आज
पहुँचे बना के शक्ल जो हम रोज़ा-दार की

रियाज़ ख़ैराबादी




किसी का हंस के कहना मौत क्यूँ आने लगी तुम को
ये जितने चाहने वाले हैं सब बे-मौत मरते हैं

रियाज़ ख़ैराबादी




कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर
शिकन रह जाएगी यूँही जबीं पर

रियाज़ ख़ैराबादी