जाम है तौबा-शिकन तौबा मिरी जाम-शिकन
सामने ढेर हैं टूटे हुए पैमानों के
रियाज़ ख़ैराबादी
जिस दिन से हराम हो गई है
मय ख़ुल्द-मक़ाम हो गई है
रियाज़ ख़ैराबादी
कह के मैं दिल की कहानी किस क़दर खोया गया
हैं फ़सानों पर फ़साने मेरे अफ़्साने के बा'द
रियाज़ ख़ैराबादी
कहाँ ये बात हासिल है तिरी मस्जिद को ऐ ज़ाहिद
सहर होते जो हम ने देखे हैं झुरमुट शिवाले में
रियाज़ ख़ैराबादी
कहना किसी का सुब्ह-ए-शब-ए-वस्ल नाज़ से
हसरत तुम्हारी जान हमारी निकल गई
रियाज़ ख़ैराबादी
कहती है ऐ 'रियाज़' दराज़ी ये रीश की
टट्टी की आड़ में है मज़ा कुछ शिकार का
रियाज़ ख़ैराबादी
कली चमन में खिली तो मुझे ख़याल आया
किसी के बंद-ए-क़बा की गिरह खुली होगी
रियाज़ ख़ैराबादी

