हिन्दोस्ताँ में धूम है किस की ज़बान की
वो कौन है 'रियाज़' को जो जानता नहीं
रियाज़ ख़ैराबादी
इस हज में वो बुत भी साथ होगा
ये सच है 'रियाज़' तो गए हम
रियाज़ ख़ैराबादी
इस से अच्छे दश्त-ए-सहरा इस से अच्छे गर्द-बाद
आलम-ए-वहशत में मेरा घर कोई घर रह गया
रियाज़ ख़ैराबादी
इस वास्ते कि आव-भगत मय-कदे में हो
पूछा जो घर किसी ने तो का'बा बता दिया
रियाज़ ख़ैराबादी
इस वास्ते कि आव-भगत मय-कदे में हो
पूछा जो घर किसी ने तो का'बा बता दिया
रियाज़ ख़ैराबादी
इतनी पी है कि ब'अद-ए-तौबा भी
बे-पिए बे-ख़ुदी सी रहती है
रियाज़ ख़ैराबादी
जाम है तौबा-शिकन तौबा मिरी जाम-शिकन
सामने ढेर हैं टूटे हुए पैमानों के
रियाज़ ख़ैराबादी

