आँख से क़त्ल करे लब से जलाए मुर्दे
शोबदा-बाज़ का अदना सा करिश्मा देखो
रिन्द लखनवी
आँख से क़त्ल करे लब से जलाए मुर्दे
शोबदा-बाज़ का अदना सा करिश्मा देखो
रिन्द लखनवी
आदमी पहचाना जाता है क़याफ़ा देख कर
ख़त का मज़मूँ भाँप लेते हैं लिफ़ाफ़ा देख कर
रिन्द लखनवी
आलम-पसंद हो गई जो बात तुम ने की
जो चाल तुम चले वो ज़माने में चल गई
रिन्द लखनवी
अगरी का है गुमाँ शक है मलागीरी का
रंग लाया है दुपट्टा तिरा मैला हो कर
रिन्द लखनवी
अगरी का है गुमाँ शक है मलागीरी का
रंग लाया है दुपट्टा तिरा मैला हो कर
रिन्द लखनवी
ऐ जुनूँ तू ही छुड़ाए तो छुटूँ इस क़ैद से
तौक़-ए-गर्दन बन गई है मेरी दानाई मुझे
रिन्द लखनवी

