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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हमारी ज़िंदगी-ओ-मौत की हो तुम रौनक़
चराग़-ए-बज़्म भी हो और चराग़-ए-फ़न भी हो

रशीद लखनवी




हमेशा बे-दिली की कीजिए क्यूँकर न दिलदारी
न होना पास दिल का है निशानी एक दिलबर की

रशीद लखनवी




हुआ है सख़्त मुश्किल दफ़न होना तेरे वहशी का
जहाँ पर क़ब्र खोदी जाती है पत्थर निकलते हैं

रशीद लखनवी




हुआ है सख़्त मुश्किल दफ़न होना तेरे वहशी का
जहाँ पर क़ब्र खोदी जाती है पत्थर निकलते हैं

रशीद लखनवी




इंतिज़ार आप का ऐसा है कि दम कहता है
निगह-ए-शौक़ हूँ आँखों से निकल जाऊँगा

रशीद लखनवी




कभी मदफ़ून हुए थे जिस जगह पर कुश्ता-ए-अबरू
अभी तक इस ज़मीं से सैकड़ों ख़ंजर निकलते हैं

रशीद लखनवी




कभी मदफ़ून हुए थे जिस जगह पर कुश्ता-ए-अबरू
अभी तक इस ज़मीं से सैकड़ों ख़ंजर निकलते हैं

रशीद लखनवी