ज़रा रूठ जाने पे इतनी ख़ुशामद
'क़मर' तुम बिगाड़ोगे आदत किसी की
क़मर जलालवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
अपनी नाकामियों पे आख़िर-ए-कार
मुस्कुराना तो इख़्तियार में है
क़मर जमील
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
एक पत्थर कि दस्त-ए-यार में है
फूल बनने के इंतिज़ार में है
क़मर जमील
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हम सितारों की तरह डूब गए
दिन क़यामत के इंतिज़ार में है
क़मर जमील
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
या इलाहाबाद में रहिए जहाँ संगम भी हो
या बनारस में जहाँ हर घाट पर सैलाब है
क़मर जमील
टैग:
| इलाहाबाद |
| 2 लाइन शायरी |
दैर ओ काबा से जो हो कर गुज़रे
दोस्त की राहगुज़र याद आई
क़मर मुरादाबादी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हर्फ़ आने न दिया इश्क़ की ख़ुद्दारी पर
काम नाकाम तमन्ना से लिया है मैं ने
क़मर मुरादाबादी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

