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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

लब-ए-शीरीं से अगर हो न तेरा लब शीरीं
कोहकन तू भी तो अब दामन-ए-कोहसार न छोड़

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी




मारा जावेगा भाग ऐ नासेह
देख ये नाज़नीं सवार आया

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी




मुझे ख़ुशी कि गिरफ़्तार मैं हुआ तेरा
तो शाद हो कि है ऐसा शिकार असीर मिरा

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी




नासेहा वा'ज़ जो कहता था तुझे बिन देखे
देखते ही तुझे फिर जान को खोते देखा

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी




नर्गिसी चश्म दिखा कर के वो वहशत-ज़दा यार
ये गया वो गया जिस तरह ग़ज़ाल आप से आप

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी




शैख़ मुझ को न डरा अपनी मुसलमानी थाम
हम फ़क़ीरों का किसी रंग से ईमान न जाए

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी




शराब साक़ी-ए-कौसर से लीजो 'आफ़रीदी'
ये बादा-नोशी-ए-दुनिया है तुझ को नंग-ए-शराब

क़ासिम अली ख़ान अफ़रीदी