कुछ रिश्ते हैं जिन की ख़ातिर
जीते जी मरना होता है
प्रेम भण्डारी
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मैं तो सब कुछ भूल चुका हूँ
तू भूले तो बात बराबर
प्रेम भण्डारी
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मेरी शोहरत के पीछे है
हाथ बहुत रुस्वाई का
प्रेम भण्डारी
मुझ को याद रहा तू भूला
बात है ये तो आदत की
प्रेम भण्डारी
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पहली साँस पे मैं रोया था आख़िरी साँस पे दुनिया
इन साँसों के बीच में हम ने क्या खोया क्या पाया
प्रेम भण्डारी
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रंग तेरा उड़ा उड़ा सा है
लग गई है तुझे नज़र शायद
प्रेम भण्डारी
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सारी बे-रंग सोच के चेहरे
लफ़्ज़ पहनें तो फिर निखरते हैं
प्रेम भण्डारी
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