ख़ुशी विसाल की अब है न रंज-ए-तन्हाई
ये किस मक़ाम पे मुझ को हयात ले आई
पयाम फ़तेहपुरी
मलामातों से जुनूँ में न कुछ कमी आई
जराहतों से बढ़ी ज़ख़्म-ए-दिल की रानाई
पयाम फ़तेहपुरी
नफ़स नफ़स पे यहाँ रहमतों की बारिश है
है बद-नसीब जिसे ज़िंदगी न रास आई
पयाम फ़तेहपुरी
फैला फ़ज़ा में नग़्मा-ए-ज़ंजीर-ए-मर्हबा
ज़िंदाँ में घुट के रह न सकी ज़िंदगी की बात
पयाम फ़तेहपुरी
सुकून दे न सकीं राहतें ज़माने की
जो नींद आई तिरे ग़म की छाँव में आई
पयाम फ़तेहपुरी
तारीख़-ए-काएनात-ए-इबादत जुनूँ से है
उन्वान-ए-अक़्ल-ओ-होश है दीवानगी की बात
पयाम फ़तेहपुरी
जब उस ने मिरा ख़त न छुआ हाथ से अपने
क़ासिद ने भी चिपका दिया दीवार से काग़ज़
पीर शेर मोहम्मद आजिज़

