दिल भी अब पहलू-तही करने लगा
हो गया तुम सा तुम्हारी याद में
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
फ़लक पे चाँद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चाँद
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
हम को भरम ने बहर-ए-तवहहुम बना दिया
दरिया समझ के कूद पड़े हम सराब में
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
हुआ न क़ुर्ब-ए-तअ'ल्लुक़ का इख़तिसास यहाँ
ये रू-शनास ज़ि-राह-ए-बईदा आया था
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
जान-ओ-दिल था नज़्र तेरी कर चुका
तेरे आशिक़ की यही औक़ात है
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
जम गए राह में हम नक़्श-ए-क़दम की सूरत
नक़्श-ए-पा राह दिखाते हैं कि वो आते हैं
पंडित जवाहर नाथ साक़ी
जज़्बा-ए-इश्क़ चाहिए सूफ़ी
जो है अफ़्सुर्दा अहल-ए-हाल नहीं
पंडित जवाहर नाथ साक़ी

