मेरी ख़ुशियों से वो रिश्ता है तुम्हारा अब तक
ईद हो जाए अगर ईद-मुबारक कह दो
नोमान शौक़
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मिरा कुछ रास्ते में खो गया है
अचानक चलते चलते रुक गया हूँ
नोमान शौक़
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मोहब्बत वाले हैं कितने ज़मीं पर
अकेला चाँद ही बे-नूर है क्या
नोमान शौक़
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मुझ को भी पहले-पहल अच्छे लगे थे ये गुलाब
टहनियाँ झुकती हुईं और तितलियाँ उड़ती हुईं
नोमान शौक़
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नाम ही ले ले तुम्हारा कोई
दोनों हाथों से लुटाऊँ ख़ुद को
नोमान शौक़
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नाम से उस के पुकारूँ ख़ुद को
आज हैरान ही कर दूँ ख़ुद को
नोमान शौक़
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पाँव के नीचे से पहले खींच ली सारी ज़मीं
प्यार से फिर नाम मेरा शाह-ए-आलम रख दिया
नोमान शौक़
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