ये भी नया सितम है हिना तो लगाएँ ग़ैर
और उस की दाद चाहें वो मुझ को दिखा के हाथ
निज़ाम रामपुरी
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ये दिन तो सर्फ़ आप के वादों में हो गए
अब दिन नया निकालिए इक़रार के लिए
निज़ाम रामपुरी
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ये हवा सर्द चली और ये बादल आए
कहो साक़ी से कि साग़र चले बोतल आए
निज़ाम रामपुरी
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यूँ तो रूठे हैं मगर लोगों से
पूछते हाल हैं अक्सर मेरा
निज़ाम रामपुरी
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ज़िद है गर है तो हो सभी के साथ
या न मिलने की ज़िद मुझी से है
निज़ाम रामपुरी
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आइने का सामना अच्छा नहीं है बार बार
एक दिन अपनी ही आँखों में खटक सकता हूँ मैं
नोमान शौक़
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आँख खुल जाए तो घर मातम-कदा बन जाएगा
चल रही है साँस जब तक चल रहा हूँ नींद में
नोमान शौक़
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