दिन को रुख़्सत किया बहाने से
रात थी वो मिरे सितारे की
नोमान शौक़
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दूर जितना भी चला जाए मगर
चाँद तुझ सा तो नहीं हो सकता
नोमान शौक़
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एक दिन दोनों ने अपनी हार मानी एक साथ
एक दिन जिस से झगड़ते थे उसी के हो गए
नोमान शौक़
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एक करवट पे रात क्या कटती
हम ने ईजाद की नई दुनिया
नोमान शौक़
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फ़लक का थाल ही हम ने उलट डाला ज़मीं पर
तुम्हारी तरह का कोई सितारा ढूँडने में
नोमान शौक़
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फ़क़ीर लोग रहे अपने अपने हाल में मस्त
नहीं तो शहर का नक़्शा बदल चुका होता
नोमान शौक़
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ग़म इस क़दर नहीं थे ढले जितने शेर में
दौलत बनाई ख़ूब मता-ए-क़लील से
नोमान शौक़
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