तेरा मिलना तो है मुश्किल मगर इतना तो हुआ
अपना मरना मुझे आसाँ न हुआ था सो हुआ
निज़ाम रामपुरी
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तेरे ही ग़म में मर गए सद-शुक्र
आख़िर इक दिन तो हम को मरना था
निज़ाम रामपुरी
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तुझ से ही छुपाऊँगा ग़म अपना
तुझ से ही कहूँगा गर कहूँगा
निज़ाम रामपुरी
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तुम हो गए कुछ और न कुछ और हम हुए
कुछ तो सबब हुआ है कि वो रब्त कम हुए
निज़ाम रामपुरी
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उस की उल्फ़त में जीते-जी मरना
फ़ाएदा ये भी ज़िंदगी से है
निज़ाम रामपुरी
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उठता हूँ उस की बज़्म से जब हो के ना-उमीद
फिर फिर के देखता हूँ कोई अब पुकार ले
निज़ाम रामपुरी
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वो इशारों में उस का कहना हाए
देखो अपने पराए बैठे हैं
निज़ाम रामपुरी
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