डरेंगे लोग वफ़ा के ख़याल से 'नज़मी'
मिरी वफ़ाओं का जिस दिन सिला मिलेगा मुझे
नज़्मी सिकंदराबादी
नसीब होंगी उसे कामयाबियाँ 'नजमी'
ख़ुशी के साथ जो हर इम्तिहाँ से गुज़रेगा
नज़्मी सिकंदराबादी
ख़ल्वत-ए-नाज़ में कुछ और ही रौनक़ होती
कोई ख़ल्वत में अगर अंजुमन-आरा होता
नाज़नीन बेगम नाज़
मिरी उम्र-ए-गुज़िश्ता की हक़ीक़त पूछने वालो
मुझे वो उम्र उम्र-ए-राएगाँ मालूम होती है
नाज़नीन बेगम नाज़
मिटा मिटा सा तसव्वुर है नाज़ माज़ी का
हयात-ए-नौ है अब इस उम्र-ए-राएगाँ से गुरेज़
नाज़नीन बेगम नाज़
क़सम ख़ुदा की ये वारफ़्तगी न थी मुझ में
किसी के इश्क़-ए-सलीक़ा-शिआ'र से पहले
नाज़नीन बेगम नाज़
सदा-बहार हो तुम और मेरी क़िस्मत हो
कोई बहार न थी इस बहार से पहले
नाज़नीन बेगम नाज़

