इस शहर-ए-बे-चराग़ में जाएगी तू कहाँ
आ ऐ शब-ए-फ़िराक़ तुझे घर ही ले चलें
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
जिन्हें हम देख कर जीते थे 'नासिर'
वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं
नासिर काज़मी
टैग:
| याद-ए-Raftagan |
| 2 लाइन शायरी |
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
नासिर काज़मी
जुदाइयों के ज़ख़्म दर्द-ए-ज़िंदगी ने भर दिए
तुझे भी नींद आ गई मुझे भी सब्र आ गया
नासिर काज़मी
टैग:
| Justaju |
| 2 लाइन शायरी |
जुर्म-ए-उम्मीद की सज़ा ही दे
मेरे हक़ में भी कुछ सुना ही दे
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कभी ज़ुल्फ़ों की घटा ने घेरा
कभी आँखों की चमक याद आई
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कहते हैं ग़ज़ल क़ाफ़िया-पैमाई है 'नासिर'
ये क़ाफ़िया-पैमाई ज़रा कर के तो देखो
नासिर काज़मी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

