EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

किस पे मरते हो आप पूछते हैं
मुझ को फ़िक्र-ए-जवाब ने मारा

मोमिन ख़ाँ मोमिन




किसी का हुआ आज कल था किसी का
न है तू किसी का न होगा किसी का

मोमिन ख़ाँ मोमिन




कुछ क़फ़स में इन दिनों लगता है जी
आशियाँ अपना हुआ बर्बाद क्या

मोमिन ख़ाँ मोमिन




क्या जाने क्या लिखा था उसे इज़्तिराब में
क़ासिद की लाश आई है ख़त के जवाब में

मोमिन ख़ाँ मोमिन




ले शब-ए-वस्ल-ए-ग़ैर भी काटी
तू मुझे आज़माएगा कब तक

मोमिन ख़ाँ मोमिन




माशूक़ से भी हम ने निभाई बराबरी
वाँ लुत्फ़ कम हुआ तो यहाँ प्यार कम हुआ

मोमिन ख़ाँ मोमिन




महशर में पास क्यूँ दम-ए-फ़रियाद आ गया
रहम उस ने कब किया था कि अब याद आ गया

मोमिन ख़ाँ मोमिन