मैं भी कुछ ख़ुश नहीं वफ़ा कर के
तुम ने अच्छा किया निबाह न की
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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मज्लिस में मिरे ज़िक्र के आते ही उठे वो
बदनामी-ए-उश्शाक़ का एज़ाज़ तो देखो
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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मेरे तग़ईर-ए-रंग को मत देख
तुझ को अपनी नज़र न हो जाए
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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मोमिन मैं अपने नालों के सदक़े कि कहते हैं
उस को भी आज नींद न आई तमाम शब
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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न करो अब निबाह की बातें
तुम को ऐ मेहरबान देख लिया
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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नासेहा दिल में तो इतना तू समझ अपने कि हम
लाख नादाँ हुए क्या तुझ से भी नादाँ होंगे
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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ने जाए वाँ बने है ने बिन जाए चैन है
क्या कीजिए हमें तो है मुश्किल सभी तरह
मोमिन ख़ाँ मोमिन
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