यक्का उलट के रह गया घोड़ा भड़क गया
काली सड़क पे चाँद सा चेहरा चमक गया
मोहम्मद अल्वी
ये कहाँ दोस्तों में आ बैठे
हम तो मरने को घर से निकले थे
मोहम्मद अल्वी
ज़मीं छोड़ने का अनोखा मज़ा
कबूतर की ऊँची उड़ानों में था
मोहम्मद अल्वी
आ जाए कहीं बाद का झोंका तो मज़ा हो
ज़ालिम तिरे मुखड़े से दुपट्टा जो उलट जाए
मोहम्मद अमान निसार
देखे कहीं रस्ते में खड़ा मुझ को तो ज़िद से
आता हो इधर को तो उधर ही को पलट जाए
मोहम्मद अमान निसार
जूँ जूँ नहीं देखे है 'निसार' अपने सनम को
तूँ तूँ यही कहता है ख़ुदा जानिए क्या है
मोहम्मद अमान निसार
ख़ंजर न कमर में है न तलवार रखे है
आँखों ही में चाहे है जिसे मार रखे है
मोहम्मद अमान निसार

