ख़्वाब ठहरे थे तो आँखें भीगने से बच गईं
वर्ना चेहरे पर तो ग़म की बारिशों का अक्स है
मलिका नसीम
जल गए फिर से कुछ हसीं रिश्ते
तंज़िया गुफ़्तुगू की भट्टी में
मालिकज़ादा जावेद
कम-उम्री में सुनते हैं
मर जाते हैं अच्छे लोग
मालिकज़ादा जावेद
मियाँ उस शख़्स से होशियार रहना
सभी से झुक के जो मिलता बहुत है
मालिकज़ादा जावेद
ज़िंदगी एक कहानी के सिवा कुछ भी नहीं
लोग किरदार निभाते हुए मर जाते हैं
मालिकज़ादा जावेद
अब देख के अपनी सूरत को इक चोट सी दिल पर लगती है
गुज़रे हुए लम्हे कहते हैं आईना भी पत्थर होता है
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद
अजीब दर्द का रिश्ता है सारी दुनिया में
कहीं हो जलता मकाँ अपना घर लगे है मुझे
मलिकज़ादा मंज़ूर अहमद

