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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

जो कुछ पड़ती है सर पर सब उठाता है मोहब्बत में
जहाँ दिल आ गया फिर आदमी मजबूर होता है

लाला माधव राम जौहर




कअ'बे की तो क्या अस्ल है उस कूचे से आगे
जन्नत हो तो जाए न गुनहगार तुम्हारा

लाला माधव राम जौहर




काबे में भी वही है शिवाले में भी वही
दोनों मकान उस के हैं चाहे जिधर रहे

लाला माधव राम जौहर




कई बार उन से पसीजा है पत्थर
ये नाले मिरे आज़माए हुए हैं

लाला माधव राम जौहर




कभी खुलता ही नहीं साफ़ कुछ इक़रार इंकार
होते हैं उन की हर इक बात में पहलू दोनों

लाला माधव राम जौहर




कहा क्या जाने क्या पैग़ाम-बर से
बहुत ख़ुश आज आता है उधर से

लाला माधव राम जौहर




कैसे बे-रहम हैं सय्याद इलाही तौबा
मौसम-ए-गुल में मुझे काट के पर रखते हैं

लाला माधव राम जौहर