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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

या रहें इस में अपने घर की तरह
या मिरे दिल में आप घर न करें

जोश मलसियानी




अहवाल देख कर मिरी चश्म-ए-पुर-आब का
दरिया से आज टूट गया दिल हुबाब का

जोशिश अज़ीमाबादी




ऐ चर्ख़ बे-कसी पे हमारी नज़र न कर
जो कुछ कि तुझ से हो सके तू दर-गुज़र न कर

जोशिश अज़ीमाबादी




ऐ ज़ुल्फ़-ए-यार तुझ से भी आशुफ़्ता-तर हूँ मैं
मुझ सा न कोई होगा परेशान-ए-रोज़गार

जोशिश अज़ीमाबादी




ऐसी मिरे ख़ज़ाना-ए-दिल में भरी है आग
फ़व्वारा छूटता है मिज़ा से शरार का

जोशिश अज़ीमाबादी




अल्लाह ता-क़यामत तुझ को रखे सलामत
क्या क्या सितम न देखे हम ने तिरे करम से

जोशिश अज़ीमाबादी




अपना दुश्मन हो अगर कुछ है शुऊर
इंतिज़ार-ए-वादा-ए-फ़र्दा न कर

जोशिश अज़ीमाबादी