मिरा ख़त पढ़ लिया उस ने मगर ये तो बता क़ासिद
नज़र आई जबीं पर बूँद भी कोई पसीने की
हीरा लाल फ़लक देहलवी
नज़रों में हुस्न दिल में तुम्हारा ख़याल है
इतने क़रीब हो कि तसव्वुर मुहाल है
हीरा लाल फ़लक देहलवी
निय्यत अगर ख़राब हुई है हुज़ूर की
घड़ लो कोई कहानी हमारे क़ुसूर की
हीरा लाल फ़लक देहलवी
पहुँचो गर इक चाँद पर सौ और आते हैं नज़र
आसमाँ जाने है कितनी दूर तक फैला हुआ
हीरा लाल फ़लक देहलवी
परतव-ए-हुस्न हूँ इस वास्ते महदूद हूँ मैं
हुस्न हो जाऊँ तो दुनिया में समा भी न सकूँ
हीरा लाल फ़लक देहलवी
रौशनी तेज़ करो चाँद सितारो अपनी
मुझ को मंज़िल पे पहुँचना है सहर होने तक
हीरा लाल फ़लक देहलवी
तन को मिट्टी नफ़स को हवा ले गई
मौत को क्या मिला मौत क्या ले गई
हीरा लाल फ़लक देहलवी

