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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

शहर-ए-ना-पुरसाँ में कुछ अपना पता मिलता नहीं
बाम-ओ-दर रौशन हैं लेकिन रास्ता मिलता नहीं

हसन आबिदी




तिश्ना-कामों को यहाँ कौन सुबू देता है
गुल को भी हाथ लगाओ तो लहू देता है

हसन आबिदी




याद-ए-याराँ दिल में आई हूक बन कर रह गई
जैसे इक ज़ख़्मी परिंदा जिस के पर टूटे हुए

हसन आबिदी




बड़ों ने उस को छीन लिया है बच्चों से
ख़बर नहीं अब क्या हो हाल खिलौने का

हसन अकबर कमाल




बनाए जाता था मैं अपने हाथ को कश्कोल
सो मेरी रूह में ख़ंजर उतरता जाता था

हसन अकबर कमाल




दिल में तिरे ख़ुलूस समोया न जा सका
पत्थर में इस गुलाब को बोया न जा सका

हसन अकबर कमाल




दिए बुझाती रही दिल बुझा सके तो बुझाए
हवा के सामने ये इम्तिहान रखना है

हसन अकबर कमाल