EN اردو
2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

है अफ़्सोस ऐ उम्र जाने का तेरे
कि तू मेरे पास एक मुद्दत रही है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी




हैं शैख़ ओ बरहमन तस्बीह और ज़ुन्नार के बंदे
तकल्लुफ़ बरतरफ़ आशिक़ हैं अपने यार के बंदे

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी




हर कोई अपनी फ़हम-ए-नाक़िस में
पुख़्ता सौदा-ए-ख़ाम रखता है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी




इश्क़ में दर्द से है हुर्मत-ए-दिल
चश्म को आबरू है आँसू से

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी




इश्क़ में ख़ूब नीं बहुत रोना
इस से इफ़शा-ए-राज़ होता है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी




इश्क़ ने सामने होते ही जलाया दिल को
जैसे बस्ती को लगावे है अदू जंग में आग

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी




जो जी चाहे है देखूँ माह-ए-नौ कहता है दिल मेरा
इधर क्या देखता है अबरू-ए-ख़मदार के बंदे

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी