क़लम में ज़ोर जितना है जुदाई की बदौलत है
मिलन के ब'अद लिखने वाले लिखना छोड़ देते हैं
शुजा ख़ावर
उस बेवफ़ा का शहर है और वक़्त-ए-शाम है
ऐसे में आरज़ू बड़ी हिम्मत का काम है
शुजा ख़ावर
उस के बयान से हुए हर-दिल-अज़ीज़ हम
ग़म को समझ रहे थे छुपाने की चीज़ हम
शुजा ख़ावर
उस को न ख़याल आए तो हम मुँह से कहें क्या
वो भी तो मिले हम से हमीं उस से मिलें क्या
शुजा ख़ावर
वस्ल हुआ पर दिल में तमन्ना
जैसी थी वैसी रक्खी है
शुजा ख़ावर
या तो जो ना-फ़हम हैं वो बोलते हैं इन दिनों
या जिन्हें ख़ामोश रहने की सज़ा मालूम है
शुजा ख़ावर
ये दुनिया-दारी और इरफ़ान का दावा 'शुजा-ख़ावर'
मियाँ इरफ़ान हो जाए तो दुनिया छोड़ देते हैं
शुजा ख़ावर
ज़िंदगी भर ज़िंदा रहने की यही तरकीब है
उस तरफ़ जाना नहीं बिल्कुल जिधर की सोचना
शुजा ख़ावर
हज़ार रंग में मुमकिन है दर्द का इज़हार
तिरे फ़िराक़ में मरना ही क्या ज़रूरी है
शुजा ख़ावर

