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परवीन शाकिर शायरी | शाही शायरी

परवीन शाकिर शेर

110 शेर

ज़िंदगी मेरी थी लेकिन अब तो
तेरे कहने में रहा करती है

परवीन शाकिर




ज़ुल्म सहना भी तो ज़ालिम की हिमायत ठहरा
ख़ामुशी भी तो हुई पुश्त-पनाही की तरह

परवीन शाकिर