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हसन बरेलवी शायरी | शाही शायरी

हसन बरेलवी शेर

19 शेर

हमारे घर से जाना मुस्कुरा कर फिर ये फ़रमाना
तुम्हें मेरी क़सम देखो मिरी रफ़्तार कैसी है

हसन बरेलवी




उल्फ़त हो किसी की न मोहब्बत हो किसी की
पहलू में न दिल हो न ये हालत हो किसी की

हसन बरेलवी




शीशा उठा कर ताक़ से हम ने
ताक़ पे रख दी साक़ी तौबा

हसन बरेलवी




पूछते जाते हैं ये हम सब से
मजलिस-ए-वाज़ में शराब भी है

हसन बरेलवी




ओ वस्ल में मुँह छुपाने वाले
ये भी कोई वक़्त है हया का

हसन बरेलवी




क्या कहूँ क्या है मेरे दिल की ख़ुशी
तुम चले जाओगे ख़फ़ा हो कर

हसन बरेलवी




किस के चेहरे से उठ गया पर्दा
झिलमिलाए चराग़ महफ़िल के

हसन बरेलवी




जो ख़ास जल्वे थे उश्शाक़ की नज़र के लिए
वो आम कर दिए तुम ने जहान भर के लिए

हसन बरेलवी




जान अगर हो जान तो क्यूँ-कर न हो तुझ पर निसार
दिल अगर हो दिल तिरी सूरत पे शैदा क्यूँ न हो

हसन बरेलवी