हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'
जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं
दाग़ देहलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हज़रत-ए-'दाग़' है ये कूचा-ए-क़ातिल उठिए
जिस जगह बैठते हैं आप तो जम जाते हैं
दाग़ देहलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हज़रत-ए-दाग़ जहाँ बैठ गए बैठ गए
और होंगे तिरी महफ़िल से उभरने वाले
दाग़ देहलवी
हज़रत-ए-दिल आप हैं किस ध्यान में
मर गए लाखों इसी अरमान में
दाग़ देहलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
हो चुका ऐश का जल्सा तो मुझे ख़त भेजा
आप की तरह से मेहमान बुलाए कोई
दाग़ देहलवी
टैग:
| खत |
| 2 लाइन शायरी |
हो सके क्या अपनी वहशत का इलाज
मेरे कूचे में भी सहरा चाहिए
दाग़ देहलवी
हुआ है चार सज्दों पर ये दावा ज़ाहिदो तुम को
ख़ुदा ने क्या तुम्हारे हाथ जन्नत बेच डाली है
दाग़ देहलवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

