ना-उमीदी है बुरी चीज़ मगर
एक तस्कीन सी हो जाती है
बिस्मिल सईदी
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ना-उमीदी है बुरी चीज़ मगर
एक तस्कीन सी हो जाती है
बिस्मिल सईदी
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रो रहा हूँ आज मैं सारे जहाँ के सामने
रोएगा कल देखना सारा जहाँ मेरे लिए
बिस्मिल सईदी
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सर जिस पे न झुक जाए उसे दर नहीं कहते
हर दर पे जो झुक जाए उसे सर नहीं कहते
बिस्मिल सईदी
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सुकूँ नसीब हुआ हो कभी जो तेरे बग़ैर
ख़ुदा करे कि मुझे तू कभी नसीब न हो
बिस्मिल सईदी
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ठोकर किसी पत्थर से अगर खाई है मैं ने
मंज़िल का निशाँ भी उसी पत्थर से मिला है
बिस्मिल सईदी
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तुम जब आते हो तो जाने के लिए आते हो
अब जो आ कर तुम्हें जाना हो तो आना भी नहीं
बिस्मिल सईदी
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