एक औरत से वफ़ा करने का ये तोहफ़ा मिला
जाने कितनी औरतों की बद-दुआएँ साथ हैं
बशीर बद्र
गले में उस के ख़ुदा की अजीब बरकत है
वो बोलता है तो इक रौशनी सी होती है
बशीर बद्र
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ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे
रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे
बशीर बद्र
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ग़ज़लों ने वहीं ज़ुल्फ़ों के फैला दिए साए
जिन राहों पे देखा है बहुत धूप कड़ी है
बशीर बद्र
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घर नया बर्तन नए कपड़े नए
इन पुराने काग़ज़ों का क्या करें
बशीर बद्र
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घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
बशीर बद्र
हँसो आज इतना कि इस शोर में
सदा सिसकियों की सुनाई न दे
बशीर बद्र
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