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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

हम मता-ए-दिल-ओ-जाँ ले के भला क्या जाएँ
ऐसी बस्ती में जहाँ कोई लुटेरा भी नहीं

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




हम ने सारा जीवन बाँटी प्यार की दौलत लोगों में
हम ही सारा जीवन तरसे प्यार की पाई पाई को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




हम ने सब को मुफ़्लिस पा के तोड़ दिया दिल का कश्कोल
हम को कोई क्या दे देगा क्यूँ मुँह-देखी बात करें

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




हम से ज़ियादा कौन समझता है ग़म की गहराई को
हम ने ख़्वाबों की मिट्टी से पाटा है इस खाई को

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




हमारी बेबसी शहरों की दीवारों पे चिपकी है
हमें ढूँडेगी कल दुनिया पुराने इश्तिहारों में

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




हमें दी जाएगी फाँसी हमारे अपने जिस्मों में
उजाड़ी हैं तमन्नाओं की लाखों बस्तियाँ हम ने

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा




इक वही खोल सका सातवाँ दर मुझ पे मगर
एक शब भूल गया फेरना जादू वो भी

अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा