टूटे हुए लोग हैं सलामत
ये नक़्ल-ए-मकानी का मोजज़ा है
अशफ़ाक़ हुसैन
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वो हो न सका अपना तो हम हो गए उस के
उस शख़्स की मर्ज़ी ही में ढाले हुए हम हैं
अशफ़ाक़ हुसैन
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ऐ जुनूँ उस की कहानी भी सुनाऊँगा तुझे
ये जो पैवंद मिरे चाक में देखा गया है
अशफ़ाक़ नासिर
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हम आइने में तिरा अक्स देखने के लिए
कई चराग़ नदी में बहाने लगते हैं
अशफ़ाक़ नासिर
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हम फ़क़त तेरी गुफ़्तुगू में नहीं
हर सुख़न हर ज़बान में हम हैं
अशफ़ाक़ नासिर
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हिज्र इंसाँ के ख़द-ओ-ख़ाल बदल देता है
कभी फ़ुर्सत में मुझे देखने आना मिरे दोस्त
अशफ़ाक़ नासिर
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जा तुझे तेरे हवाले कर दिया
खेंच ले ये हाथ फैलाया हुआ
अशफ़ाक़ नासिर
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