सारी दुनिया को जीतने वाला
अपने बच्चों से हार जाता है
असग़र शमीम
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सर पे दस्तार जब सलामत है
दिल में आती हुई अना से डर
असग़र शमीम
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शहर तो कब का जल चुका 'असग़र'
उठ रहा है मगर धुआँ अब तक
असग़र शमीम
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तलातुम में कभी उतरा था 'असग़र'
समुंदर आज तक सहमा हुआ है
असग़र शमीम
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ऐ चारागरो पास तुम्हारे न मिलेगी
बीमार-ए-मोहब्बत की दवा और ही कुछ है
असग़र वेलोरी
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दुनिया से ख़त्म हो गया इंसान का वजूद
रहना पड़ा है हम को दरिंदों के दरमियाँ
असग़र वेलोरी
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जितना रोना था रो चुके आदम
और रोएगा आदमी कब तक
असग़र वेलोरी
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