कम न थी तेग़ से अदा-ए-ख़िराम
दोस्त दुश्मन की शान से निकला
आरज़ू लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
कर पहले दिल पे क़ाबू जामे की फिर ख़बर ले
दामन बचाने वाले जाती है आस्तीं भी
आरज़ू लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ख़ाली न अंदलीब का सोज़-ए-नफ़स गया
वो लू चली कि रंग गुलों का झुलस गया
आरज़ू लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ख़मोश जलने का दिल के कोई गवाह नहीं
कि शो'ला सुर्ख़ नहीं है धुआँ स्याह नहीं
आरज़ू लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |
ख़मोशी मेरी मअनी-ख़ेज़ थी ऐ आरज़ू कितनी
कि जिस ने जैसा चाहा वैसा अफ़्साना बना डाला
आरज़ू लखनवी
टैग:
| खामोशी |
| 2 लाइन शायरी |
ख़िज़ाँ का भेस बना कर बहार ने मारा
मुझे दो-रंगी-ए-लैल-ओ-नहार ने मारा
आरज़ू लखनवी
ख़ुशबू कहीं छुपी है मोहब्बत के फूल की
ली एक साँस और गली तक महक गई
आरज़ू लखनवी
टैग:
| 2 लाइन शायरी |

