सर-बुलंदी मिरी तंहाई तक आ पहुँची है
मैं वहाँ हूँ कि जहाँ कोई नहीं मेरे सिवा
अरशद अब्दुल हमीद
सुख़न के चाक में पिन्हाँ तुम्हारी चाहत है
वगरना कूज़ा-गरी की किसे ज़रूरत है
अरशद अब्दुल हमीद
उन्हें ये ज़ोम कि बे-सूद है सदा-ए-सुख़न
हमें ये ज़िद कि इसी हाव-हू में फूल खिले
अरशद अब्दुल हमीद
ये दुनिया अकबर ज़ुल्मों की हम मजबूरी की अनारकली
हम दीवारों के बीच में हैं हम नरग़ा-ए-जब्र-ओ-जलाल में हैं
अरशद अब्दुल हमीद
ये इंतिज़ार नहीं शम्अ है रिफ़ाक़त की
इस इंतिज़ार से तन्हाई ख़ूब-सूरत है
अरशद अब्दुल हमीद
ये किस को याद किया रूह की ज़रूरत ने
ये किस के नाम से मेरे लहू में फूल खिले
अरशद अब्दुल हमीद
ज़मीं के पास किसी दर्द का इलाज नहीं
ज़मीन है कि मिरे अहद की सियासत है
अरशद अब्दुल हमीद

