वो कौन है जो मिरे साथ साथ चलता है
ये देखने को कई बार रुक गया हूँ मैं
सलीम बेताब
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बहुत क़रीब से कुछ भी न देख पाओगे
कि देखने के लिए फ़ासला ज़रूरी है
सलीम फ़ौज़
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सुकूत बढ़ने लगा है सदा ज़रूरी है
कि जैसे हब्स में ताज़ा हवा ज़रूरी है
सलीम फ़ौज़
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सुकूत बढ़ने लगा है सदा ज़रूरी है
कि जैसे हब्स में ताज़ा हवा ज़रूरी है
सलीम फ़ौज़
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अँधेरे को निगलता जा रहा हूँ
दिया हूँ और जलता जा रहा हूँ
सलीम फ़िगार
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कहीं आँखें कहीं बाज़ू कहीं से सर निकल आए
अँधेरा फैलते ही हर तरफ़ से डर निकल आए
सलीम फ़िगार
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कहीं आँखें कहीं बाज़ू कहीं से सर निकल आए
अँधेरा फैलते ही हर तरफ़ से डर निकल आए
सलीम फ़िगार
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