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2 लाइन शायरी शायरी | शाही शायरी

2 लाइन शायरी

22761 शेर

कौनैन-ए-ऐन-ए-इल्म में है जल्वा-गाह-ए-हुस्न
जेब-ए-ख़िरद से ऐनक-ए-इरफ़ाँ निकालिए

साहिर देहल्वी




किताब-ए-दर्स-ए-मजनूँ मुसहफ़-रुख़्सार-ए-लैला है
हरीफ़-ए-नुक्ता-दान-ए-इश्क़ को मकतब से क्या मतलब

साहिर देहल्वी




किताब-ए-दर्स-ए-मजनूँ मुसहफ़-रुख़्सार-ए-लैला है
हरीफ़-ए-नुक्ता-दान-ए-इश्क़ को मकतब से क्या मतलब

साहिर देहल्वी




क्या शौक़ का आलम था कि हाथों से उड़ा ख़त
दिल थाम के उस शोख़ को लिखने जो लगा ख़त

साहिर देहल्वी




मैं दीवाना हूँ और दैर-ओ-हरम से मुझ को वहशत है
पड़ी रहने दो मेरे पाँव में ज़ंजीर-ए-मय-ख़ाना

साहिर देहल्वी




मैं दीवाना हूँ और दैर-ओ-हरम से मुझ को वहशत है
पड़ी रहने दो मेरे पाँव में ज़ंजीर-ए-मय-ख़ाना

साहिर देहल्वी




मिल-मिला के दोनों ने दिल को कर दिया बरबाद
हुस्न ने किया बे-ख़ुद इश्क़ ने किया आज़ाद

साहिर देहल्वी