क़द्र मुझ रिंद की तुझ को नहीं ऐ पीर-ए-मुग़ाँ
तौबा कर लूँ तो कभी मय-कदा आबाद न हो
रियाज़ ख़ैराबादी
क़द्र मुझ रिंद की तुझ को नहीं ऐ पीर-ए-मुग़ाँ
तौबा कर लूँ तो कभी मय-कदा आबाद न हो
रियाज़ ख़ैराबादी
क़ुलक़ुल-ए-मीना सदा नाक़ूस की शोर-ए-अज़ाँ
ठंडे ठंडे दीदनी है गर्मी-ए-बाज़ार-ए-सुब्ह
रियाज़ ख़ैराबादी
रंग लाएगा दीदा-ए-पुर-आब
देखना दीदा-ए-पुर-आब का रंग
रियाज़ ख़ैराबादी
रहमत से 'रियाज़' उस की थे साथ फ़रिश्ते दो
इक हूर जो बढ़ जाती तो और मज़ा होता
रियाज़ ख़ैराबादी
'रियाज़' आने में है उन के अभी देर
चलो हो आएँ मर्ग-ए-ना-गहाँ तक
रियाज़ ख़ैराबादी
'रियाज़' आने में है उन के अभी देर
चलो हो आएँ मर्ग-ए-ना-गहाँ तक
रियाज़ ख़ैराबादी

