डराता है हमें महशर से तू वाइज़ अरे जा भी
ये हंगामे तो हम ने रोज़ कू-ए-यार में देखे
रियाज़ ख़ैराबादी
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दर्द हो तो दवा करे कोई
मौत ही हो तो क्या करे कोई
रियाज़ ख़ैराबादी
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देखिएगा सँभल कर आईना
सामना आज है मुक़ाबिल का
रियाज़ ख़ैराबादी
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दिल-जलों से दिल-लगी अच्छी नहीं
रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं
रियाज़ ख़ैराबादी
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दिल-जलों से दिल-लगी अच्छी नहीं
रोने वालों से हँसी अच्छी नहीं
रियाज़ ख़ैराबादी
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एक वाइज़ है कि जिस की दावतों की धूम है
एक हम हैं जिस के घर कल मय उधार आने को थी
रियाज़ ख़ैराबादी
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ग़लत है आप न थे हम-कलाम ख़ल्वत में
अदू से आप की तस्वीर बोलती होगी
रियाज़ ख़ैराबादी
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