यही इक सानेहा कुछ कम नहीं है
हमारा ग़म तुम्हारा ग़म नहीं है
ओबैदुर् रहमान
फ़लक से मुझ को शिकवा है ज़मीं से मुझ को शिकवा है
यक़ीं मानो तो ख़ुद अपने यक़ीं से मुझ को शिकवा है
उबैदुर्रहमान आज़मी
ऐसा न हो ये रात कोई हश्र उठा दे
उठता है सितारों से धुआँ जागते रहना
ओवेस अहमद दौराँ
बहती नहीं है मर्द की आँखों से जू-ए-अश्क
लेकिन हमें बताओ कि हम किस लिए हँसें
ओवेस अहमद दौराँ
बे-दारों की दुनिया कभी लुटती नहीं 'दौराँ'
इक शम्अ लिए तुम भी यहाँ जागते रहना
ओवेस अहमद दौराँ
हम शाएर-ए-हयात हैं हम शाएर-ए-हयात!
'दौराँ' वो सुर्ख़ रंग का परचम तो दो हमें
ओवेस अहमद दौराँ
कुछ दर्द के मारे हैं कुछ नाज़ के हैं पाले
कुछ लोग हैं हम जैसे कुछ लोग हैं तुम जैसे
ओवेस अहमद दौराँ

