इन्हें आगे निकल जाने दो 'हारिस'
बलाएँ कब से पीछा कर रही हैं
उबैद हारिस
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ख़ाली दीवार बुरी लगती है
मेरी तस्वीर ही रहने देते
उबैद हारिस
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खोलो न कोई ऐब किसी का भी यहाँ पर
आसेब को मिल जाएगा दरवाज़ा खुला सा
उबैद हारिस
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नया चार दिन में पुराना हुआ
यही सब हुआ तो नया क्या हुआ
उबैद हारिस
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सदाएँ डूबती हैं जब
ख़मोशी मुस्कुराती है
उबैद हारिस
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तह-ब-तह खुलती ही रहती है सदा
'मीर' के दीवान सी है ज़िंदगी
उबैद हारिस
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वक़्त बदला सोच बदली बात बदली
हम से बच्चे कह रहे हैं हम नए हैं
उबैद हारिस
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